Mumbai | मुंबई, 7 मई 2026: मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने अपने मेंटेनेंस एंड इंजीनियरिंग (एमएंडई) विभाग द्वारा पिछले चार वर्षों में पास किए गए सभी प्रोजेक्ट्स की गहन जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के बाद की गई है, जिसमें घटिया सामग्री की खरीद और अत्यधिक महंगी दरों पर टेंडर दिए जाने का दावा किया गया है। भाजपा के कंसलर मकरंद नार्वेकर ने स्टैंडिंग कमिटी की बैठक में इस मुद्दे को जोरदार ढंग से उठाया और विभाग पर ₹63 करोड़ के मेगा घोटाले का आरोप लगाया।
स्टैंडिंग कमिटी की बुधवार को हुई बैठक में नार्वेकर ने खुलासा किया कि शहर के स्काईवॉक्स के नीचे लगाई गईं एलईडी लाइटें न केवल घटिया क्वालिटी की हैं, बल्कि इनकी कीमत भी आसमान छू रही है। उन्होंने बताया कि गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल पर ये लाइटें मात्र ₹700 प्रति यूनिट उपलब्ध हैं, लेकिन बीएमसी ने इन्हें ₹9,993 प्रति यूनिट की दर से खरीदा। इस एक ही आइटम में हुए भ्रष्टाचार से कुल ₹63 करोड़ का नुकसान हुआ है। नार्वेकर ने एमएंडई विभाग के सभी कार्यों पर व्हाइट पेपर जारी करने और चार सालों के हर प्रोजेक्ट की विस्तृत जांच की मांग की।
शिवसेना (शिंदे गुट) के ग्रुप लीडर अमेय घोले ने भी इस मुद्दे पर समर्थन जताते हुए विशेष हाउस मीटिंग बुलाने की मांग की, ताकि विभाग में व्याप्त अनियमितताओं पर खुलकर चर्चा हो सके। स्टैंडिंग कमिटी के चेयरमैन प्रभाकर शिंदे ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बीएमसी अधिकारियों को 15 दिनों के अंदर पूरी जांच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।
यह जांच आदर्श व्यवस्था (एडमिनिस्ट्रेटिव रूल) के दौरान हुए सभी प्रस्तावों पर केंद्रित होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आरोप सही साबित हुए, तो यह बीएमसी के सबसे बड़े घोटालों में से एक हो सकता है। मुंबईवासी लंबे समय से civic infrastructure में घटिया काम और भ्रष्टाचार की शिकायतें करते रहे हैं। नार्वेकर ने कहा, “यह सिर्फ LED लाइट्स की बात नहीं, बल्कि पूरे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल है। जनता का पैसा लूटा जा रहा है।”
बीजेपी नेता ने आगे जांच में सभी टेंडर फाइल्स, खरीद प्रक्रिया और क्वालिटी टेस्ट रिपोर्ट्स की बारीकी से जांच की मांग की है। इस मामले ने राजनीतिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि यह BMC के सबसे महत्वपूर्ण विभागों में से एक है जो शहर की सड़कों, स्काईवॉक्स, पुलों और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर का रखरखाव करता है।
जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषी पाए गए अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें आपराधिक मामला भी दर्ज हो सकता है। मुंबईकर अब इंतजार कर रहे हैं कि इस जांच से कब तक सच्चाई सामने आएगी।
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