Mumbai : मुंबई: गेटवे ऑफ इंडिया के पास नए पैसेंजर जेट्टी प्रोजेक्ट पर काम अचानक रुका, 1.5 साल में ही ₹186.67 करोड़ का EPC कॉन्ट्रैक्ट रद्द
मुंबई के ऐतिहासिक गेटवे ऑफ इंडिया के पास निर्माणाधीन नई पैसेंजर जेट्टी परियोजना को बड़ा झटका लगा है। महाराष्ट्र मैरिटाइम बोर्ड (MMB) ने RKEC Projects को दिया गया ₹186.67 करोड़ का EPC कॉन्ट्रैक्ट लगभग 1.5 साल बाद रद्द कर दिया है, जिसके बाद जेट्टी निर्माण के काम पर अस्थायी रूप से ब्रेक लग गया है।



प्रोजेक्ट की उम्मीदें और देरी
इस प्रोजेक्ट का मकसद गेटवे ऑफ इंडिया और रेडियो क्लब क्षेत्र से नाव यातायात को री‑राउट करना था, ताकि भीड़, ट्रैफिक कंजेशन और पुराने जेट्टी ढांचों की समस्या कम हो सके। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह माना जा रहा था कि ऑगस्ट 2026 तक नई पैसेंजर जेट्टी ऑपरेशनल हो जाएगी, लेकिन लगातार PIL, डिजाइन में बदलाव और अनुमति‑संबंधी उलझनों के कारण काम लगातार रुकता रहा।
कॉन्ट्रैक्ट रद्द क्यों?
बोर्ड की तरफ से दिए गए नोटिस में “देरी” और “टाइम‑लाइन न मिलना” जैसे कारण दिखाए गए हैं, लेकिन ठेकेदार की तरफ से दावा है कि रोक‑थाम ज्यादातर बाहरी कारकों—जैसे याचिकाएं, नीतिगत बदलाव और अनुमति‑प्रक्रिया—की वजह से आई। इस तरह देरी के जिम्मेदारी का सवाल अब न केवल वित्तीय बल्कि कानूनी और नीतिगत स्तर पर भी उठ रहा है।
अब आर्बिट्रेशन की राह
RKEC Projects कंपनी अपने हिसाब से किए गए काम और खर्च पर ब्याज सहित मुआवजा वसूली के लिए आर्बिट्रेशन के रास्ते पर जाने की तैयारी कर चुकी है। इस विवाद के बीच अब यह भी सवाल है कि गेटवे के पास नई जेट्टी कब तक खुलेगी, MMB कौन‑सी कंपनी को फिर नया कॉन्ट्रैक्ट देगा और पुनः देरी से बचने के लिए क्या नीतिगत सुधार होंगे।
इस पूरे मामले से साफ होता है कि उम्मीदों से भरे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट भी, जब नीतिगत टकराव, जन‑विरोध और ठेकेदार‑सरकार के बीच विवाद जुड़ जाएं, तो आसानी से राजनीतिक और वित्तीय बोझ बन सकते हैं।
इस पूरे मामले से साफ होता है कि गेटवे ऑफ इंडिया जैसे संवेदनशील इलाके में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट सिर्फ टेक्निकल नहीं, बल्कि जन‑सहमति, पारदर्शी नियोजन और ठेकेदार‑सरकार के बीच स्पष्ट जिम्मेदारी बंटवारे पर भी निर्भर करते हैं।
मुंबई के स्थानीय लोगों की राय इस जेट्टी प्रोजेक्ट को लेकर लगातार संदेह और विरोध वाली रही है, जिसके कई साफ कारण हैं।
लोग क्यों नाराज हैं?
कोलाबा और आसपास के निवासियों का कहना है कि यह जेट्टी गेटवे ऑफ इंडिया के आसपास की ट्रैफिक, भीड़ और पर्यावरण की समस्या को और बढ़ाएगी, न कि कम करेगी।
विरासत और पर्यावरण संरक्षणवादी इसे ऐतिहासिक वातावरण और तटीय पारिस्थितिकी के लिए खतरा मानते हैं और चाहते हैं कि जेट्टी दूसरी जगह (जैसे प्रिंसेस डॉक, फेरी घाट या बैलार्ड एस्टेट) शिफ्ट की जाए।
कॉन्ट्रैक्ट रद्द होने पर लोकल सेंटिमेंट
कई लोकल ग्रुप और नागरिक इस बात से खुश हैं कि अचानक राजनीति‑चालित या जल्दबाजी में शुरू किए गए इस बड़े प्रोजेक्ट पर रोक लगी, खासकर जब PIL और लोगों की आपत्तियों के बावजूद काम जारी था।
पर्यावरण विशेषज्ञ गेटवे ऑफ इंडिया के पास जेट्टी प्रोजेक्ट को लेकर काफी सावधान और आलोचनात्मक राय रख रहे हैं, खासकर तटीय पारिस्थितिकी, जलवायु‑संबंधी जोखिम और शहरी योजना के मद्देनजर।
मुख्य चिंताएँ
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के बड़े समुद्री स्ट्रक्चर से तटीय जल‑प्रवाह और लहरों की प्राकृतिक गति बिगड़ सकती है, जिससे अपरदन, गाद‑जमाव और भविष्य में बाढ़‑जैसे जोखिम बढ़ सकते हैं।
उनका तर्क है कि जेट्टी निर्माण से समुद्री जैव‑विविधता और किनारे के बायोटा (मछलियाँ, जलीय जीव, रेडियो‑क्लब तट के इकोसिस्टम) पर दबाव बढ़ सकता है, खासतौर पर जल‑प्रदूषण और निर्माण‑संबंधित ध्वनि‑प्रदूषण क कारण।
कई पर्यावरण‑नीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे प्रोजेक्ट “पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA)” को वास्तविक रूप से लागू किए बिना, सिर्फ आर्थिक या राजनीतिक दबाव में आगे बढ़ाए जाते हैं, जिससे बाद में नुकसान महँगा और अनुल्ट करना मुश्किल हो जाता है।
वे जलवायु अनुकूलन और जोखिम‑मुक्त योजना (जैसे तटवर्ती “रक्षा कवच” बनाना, जल‑स्तर उठने का प्रतिरोध‑मॉडल रखना) को ज़रूरी मानते हैं, लेकिन एकल‑उद्देशीय इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे जेट्टी) से इन चुनौतियों का ठीक से सामना नहीं हो पाता, जिससे दीर्घकालिक जोखिम बना रहता है।
यानी, पर्यावरण विशेषज्ञ जेट्टी प्रोजेक्ट को “बिल्कुल गलत” नहीं कह रहे, बल्कि उसकी स्थिति, डिजाइन, जोखिम‑मूल्यांकन और जन‑भागीदारी को लेकर गंभीर आपत्ति और निगरानी चाहते हैं, ताकि पर्यावरण और शहर दोनों को भविष्य के नुकसान से बचाया जा सके।
“BandhuNews की रिपोर्ट के अनुसार जेट्टी प्रोजेक्ट ऐतिहासिक गेटवे ऑफ इंडिया के आसपास के कोलाबा, रेडियो क्लब और आसपास के रिहायशी इलाकों के दैनिक जीवन, ट्रैफिक और वातावरण पर भारी असर डाल सकता है, जिसे स्थानीय लोग ‘अनावश्यक भार’ और ‘पर्यावरण और विरासत के लिए खतरा’ मान रहे हैं।”
मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से जेट्टी प्रोजेक्ट पर काम वर्तमान में रुका हुआ है, लेकिन यह कब फिर से शुरू होगा—इसकी कोई आधिकारिक या ठोस तारीख अभी महाराष्ट्र मैरिटाइम बोर्ड या राज्य सरकार की तरफ से जारी नहीं की गई है।



