Devendra Fadnavis का बड़ा बयान: मुंबई में वायु प्रदूषण पर लगेगी IoT और AI से नजर

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Mumbai : महाराष्ट्र विधानसभा के उच्च सदन में बुधवार को वायु प्रदूषण का मुद्दा जोर-शोर से उठा। इस दौरान महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया कि मुंबई जैसे महानगर में बढ़ते प्रदूषण से निपटने के लिए पारंपरिक मॉनिटरिंग सिस्टम पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि तकनीक की मदद से प्रदूषण के हर स्रोत को ट्रैक किया जाए।

मुख्यमंत्री ने बताया कि Brihanmumbai Municipal Corporation (बीएमसी) को इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित एक डायनामिक मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं। उनका कहना था कि जब तक सिस्टम 100 प्रतिशत IoT और AI आधारित नहीं होगा, तब तक प्रदूषण के असली स्रोतों की सटीक पहचान और प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं है।

विधानसभा में कैसे उठा मुद्दा?

प्रश्नकाल के दौरान Anil Parab (शिवसेना-यूबीटी) ने मुंबई के बांद्रा स्थित खेरवाड़ी इलाके में बढ़ते वायु प्रदूषण का मुद्दा उठाया। उन्होंने खास तौर पर कंस्ट्रक्शन साइट्स, बिल्डिंग प्रोजेक्ट्स और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर कार्यों से निकलने वाली धूल और प्रदूषकों की ओर ध्यान दिलाया।

परब ने कहा कि कई इलाकों में स्थानीय नागरिक लगातार खराब एयर क्वालिटी से जूझ रहे हैं, लेकिन प्रदूषण के वास्तविक स्रोतों पर सख्त निगरानी की कमी दिख रही है।

पर्यावरण मंत्री का जवाब

राज्य की पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्री Pankaja Munde ने एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) के आंकड़ों में संभावित गड़बड़ियों की ओर संकेत किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदूषण से संबंधित आधिकारिक और प्रमाणिक आंकड़ों के लिए Maharashtra Pollution Control Board (एमपीसीबी) और Central Pollution Control Board (सीपीसीबी) के डेटा पर भरोसा किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार वैज्ञानिक और तकनीकी आधार पर ही आगे की रणनीति तय कर रही है।

क्या होगा नया IoT और AI सिस्टम?

मुख्यमंत्री फडणवीस के अनुसार प्रस्तावित सिस्टम की मुख्य विशेषताएं होंगी:
शहरभर में स्मार्ट सेंसर नेटवर्क
रियल-टाइम डेटा कलेक्शन
प्रदूषण के सोर्स की ऑटोमैटिक पहचान
सरकारी और निजी प्रोजेक्ट्स की निगरानी
उल्लंघन की स्थिति में तुरंत अलर्ट और कार्रवाई


उन्होंने दावा किया कि यह सिस्टम 100 प्रतिशत प्रदूषक स्रोतों को ट्रैक करने में सक्षम होगा — चाहे वे सरकारी हों या निजी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं।

राज्यभर में बढ़ती चिंता

विधान परिषद में कई अन्य सदस्यों ने भी राज्य के विभिन्न हिस्सों में बढ़ते प्रदूषण स्तर पर चिंता जताई। औद्योगिक क्षेत्रों, तेजी से बढ़ते शहरीकरण और निर्माण गतिविधियों को प्रदूषण के प्रमुख कारणों में गिना गया।

सरकार का कहना है कि तकनीक आधारित समाधान से पारदर्शिता बढ़ेगी और जिम्मेदारी तय करना आसान होगा।

आगे क्या?

अब निगाहें इस बात पर हैं कि बीएमसी कितनी तेजी से इस हाई-टेक मॉनिटरिंग सिस्टम को लागू करती है और क्या इससे मुंबई की हवा की गुणवत्ता में वास्तविक सुधार देखने को मिलता है।


अगर यह मॉडल सफल होता है, तो इसे राज्य के अन्य बड़े शहरों में भी लागू किया जा सकता है।

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