Mumbai : महाराष्ट्र सरकार ने धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों को लेकर बड़ा कदम उठाया है। राज्य कैबिनेट ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत अब किसी भी व्यक्ति को धर्म परिवर्तन करने से पहले संबंधित सरकारी प्राधिकरण को कम से कम 60 दिन पहले सूचना देना और अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
सरकार का कहना है कि इस प्रस्तावित कानून का उद्देश्य जबरन, लालच या धोखे से कराए जाने वाले धर्म परिवर्तन पर रोक लगाना और लोगों की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करना है।
धर्म परिवर्तन के बाद 25 दिन में पंजीकरण जरूरी
प्रस्तावित बिल के अनुसार यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करता है, तो उसे धर्म परिवर्तन के 25 दिनों के भीतर संबंधित प्राधिकरण के पास पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।
यदि तय समय सीमा के भीतर धर्म परिवर्तन का पंजीकरण नहीं कराया जाता है, तो उस धर्म परिवर्तन को अमान्य माना जाएगा। इस नियम का पालन न करने पर कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
शिकायत दर्ज कराने का भी प्रावधान
इस बिल में यह भी प्रावधान रखा गया है कि यदि किसी व्यक्ति के रक्त संबंधी रिश्तेदार को यह संदेह होता है कि धर्म परिवर्तन जबरन, लालच या धोखे से कराया गया है, तो वह इसकी शिकायत दर्ज करा सकता है।
ऐसी स्थिति में पुलिस एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच करेगी और यदि धर्म परिवर्तन गैरकानूनी तरीके से कराया गया पाया गया तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का भी उल्लेख
बिल में यह स्पष्ट किया गया है कि भारत के संविधान के तहत हर व्यक्ति को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है। कोई भी व्यक्ति अपनी इच्छा से किसी भी धर्म को मान सकता है।
लेकिन इस अधिकार का इस्तेमाल बल, दबाव, धोखाधड़ी या लालच देकर धर्म परिवर्तन कराने के लिए नहीं किया जा सकता। इसलिए सरकार का कहना है कि यह कानून ऐसे अवैध मामलों को रोकने के लिए लाया जा रहा है।
अब आगे क्या होगा
महाराष्ट्र कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद यह ड्राफ्ट बिल अब आगे की विधायी प्रक्रिया से गुजरेगा। इसे विधानसभा में पेश किया जाएगा और वहां से पारित होने के बाद ही यह कानून के रूप में लागू हो सकेगा।
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