शहीद मेजर अनुज सूद की पत्नी को 3 साल बाद भी महाराष्ट्र ने नहीं दी राहत, बॉम्बे हाई कोर्ट ने लगाई फटकार पढ़िए पूरी खबर

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बॉम्बे हाई कोर्ट ने उस समय महाराष्ट्र के अधिकारियों पर नाराजगी जताई, जब पाया कि शहीद की विधवा को लाभ नहीं मिला। सरकारी अफसरों ने उसे यह कहते हुए लाभ नहीं दिए कि वह महाराष्ट्र में नहीं रहती हैं। उनके पति जम्मू-कश्मीर में शहीद हो गए थे। उनके ससुर भी सेना में थे।

मुंबई: बॉम्बे हाई कोर्ट ने शहीद मेजर की पत्नी को राहत देने को लेकर निर्णय में देरी पर नाराजगी जाहिर की है। कोर्ट ने कहा कि सरकार कुछ मुद्दों पर बिजली की गति से फैसले लेती है, लेकिन शहीद की विधवा को राहत देने में अपने कदम क्यों पीछे खींच रहे हैं। 

फैसले में विलंब से सरकार की बदनामी होगी। सरकार के पास तेजी से निर्णय लेने की क्षमता है। मुख्यमंत्री के लिए तो यह एक बहुत छोटा मुद्दा है। कोर्ट में 30 वर्षीय शहीद मेजर अनुज सूद की पत्नी आकृति की याचिका पर सुनवाई चल रही है। याचिका में सूद की पत्नी ने याचिका में सरकार के 2000 और 2019 के जीआर के तहत आर्थिक राहत देने का निर्देश देने की मांग की है।

सरकार के सैनिक वेलफेयर विभाग ने शहीद की पत्नी को इसलिए लाभ के लिए अपात्र ठहरा दिया था,क्योंकि उसके पति लगातार 15 सालों तक महाराष्ट्र में नहीं रहे थे और उनका जन्म महाराष्ट्र में नहीं हुआ था। विभाग के इस असंवेदशील रवैये के खिलाफ आकृति ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की है।

30 वर्षीय मेजर सूद 2 मई 2020 को जम्मू-कश्मीर में आतंकी ठिकाने से बंधक नागरिकों को बाहर निकालते समय वीरगति को प्राप्त हो गए थे। सूद की इस अभूतपूर्व बहादुरी के लिए उन्हें राष्ट्रपति ने शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया था। याचिका में मेजर की पत्नी ने दावा किया है कि उसके ससुर भी सेना में थे। इसलिए पति का जन्म कर्नाटक में हुआ था। उनका पुणे में घर है। देश के लिए बलिदान देनेवाले उसके पति पुणे में सेटल होना चाहते थे।

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