बजरंग दल पर बैन के कांग्रेस के वादे पर छिड़ा विवाद, किसको होगा फ़ायदा पढ़िए पूरी खबर

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कर्नाटक के चुनावी समर में बीजेपी के लिए ‘जैसे को तैसा वाला’ माहौल है. बीजेपी कांग्रेस पार्टी को चौतरफ़ा घेरने की कोशिश कर रही है जिसने अपने घोषणापत्र में बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने का वादा किया है.

और इस हमले की अगुवाई खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर रहे हैं और इसकी वजह से 10 मई को होने जा रहे विधानसभा चुनाव का प्रचार अभियान गरम हो गया है.

बीजेपी के नेता इस बात से अधिक आहत हैं कि कांग्रेस ने विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के यूथ विंग बजरंग दल की तुलना पॉपुलर फ़्रंट ऑफ़ इंडिया (पीएफ़आई) से की है.

बीजेपी नेता पीएफ़आई को चरमपंथी संगठन बताते हैं, जोकि केंद्र सरकार द्वारा पहले ही पूरे देश में प्रतिबंधित है. एक दिन पहले कांग्रेस ने बीजेपी की तीखी आलोचना की थी, क्योंकि उसने अपने घोषणापत्र में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का वादा किया था.

पिछले पांच दिनों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर्नाटक में हर रोज़ तीन चार रैलियां कर रहे हैं. इन रैलियों में अब वो अपनी पार्टी के विकास के मुद्दे पर बात नहीं कर रहे हैं और अब उन्होंने अपना फ़ोकस हनुमान और बजरंग दल पर कर लिया है.

दूसरी तरफ़ कांग्रेस ने जवाबी हमला बोलते हुए कहा, “भगवान हनुमान के करोड़ों भक्तों से प्रधानमंत्री को माफ़ी मांगनी चाहिए. वो हमारी रक्षा करते हैं और आप बजरंग दल की तुलना बजरंग बली से करके उनका अपमान कर रहे हैं. हमारे धार्मिक विश्वास को ठेस पहुंचाने की कोई सीमा होती है.”

पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने एक प्रेस कांफ्रेंस कर पीएम की तीख़ी आलोचना की.

साल 2008 में मेंगलुरु में चर्चों पर हमले में बजरंग दल शामिल रही है. ये घटना कर्नाटक में पहली बार बीजेपी सरकार के आने के एक महीने बाद ही हुई. गौरक्षा के नाम पर डराने धमकाने के लिए बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ मामले दर्ज किये गए हैं. उडुपी में हुई एक घटना में बीजेपी युवा मोर्चा का एक सदस्य एक छोटी वैन में पशु ले जाते हुए मारा गया था.

बजरंग दल के कार्यकर्ता लड़के लड़कियों के बाहर घूमने के ख़िलाफ़ कथित तौर पर मॉरल पुलिसिंग वाली कई घटनाओं में शामिल रहे हैं.

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