अतीक अहमद की हत्या मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पूछे ये 3 तीखे सवाल, विकास दुबे एनकाउंटर का भी आया जिक्र पढ़िए पूरी खबर

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अतीक अहमद और अशरफ की मीडियाकर्मी बनकर आए तीन लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी. यह हत्या उस वक्त की गयी थी जब दोनों को पुलिस स्वास्थ्य जांच के लिए मेडिकल कॉलेज लेकर आई थी.

माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या की जांच पर सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है. राज्य सरकार को 3 हफ्ते में यह रिपोर्ट देनी है. सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में मामले की जांच रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज की निगरानी में करवाने की मांग की गई थी, लेकिन फिलहाल कोर्ट ने इस पर कोई आदेश नहीं दिया है. 

जस्टिस एस रविंद्र भट और दीपंकर दत्ता की बेंच ने यूपी सरकार के इस बयान को रिकॉर्ड पर लिया कि उसने जांच के लिए सेवानिवृत्त हाई कोर्ट जज की अध्यक्षता में आयोग का गठन किया है. साथ ही पुलिस ने भी एसआईटी बनाई है. राज्य सरकार की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कोर्ट से कहा कि सरकार खुद सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करेगी. जजों ने इस पर सहमति जताई. 

सुप्रीम कोर्ट ने पूछे तीन सवाल
15 अप्रैल को माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की प्रयागराज में हत्या हो गई थी.  इस पर सुनवाई करते हुए जजों ने इस बात पर तीखे सवाल किए कि अतीक और अशरफ को पैदल हॉस्पिटल क्यों लाया गया? उन्हें एंबुलेंस से क्यों नहीं लाया गया? हत्यारों को इस बात की जानकारी कैसे मिली कि दोनों को हॉस्पिटल लाया जा रहा है?

इसका जवाब देते हुए यूपी सरकार के वकील ने कहा कि हर 2 दिन में स्वास्थ्य जांच करवाने का नियम पहले से चला आ रहा है. दूरी बहुत कम होने के चलते दोनों को पैदल ही लाया गया। हत्यारे वहां पत्रकारों की आड़ में छुपे हुए थे. 

मुकुल रोहतगी का जवाब सुनने के बाद जजों ने कहा कि यूपी सरकार हत्या की परिस्थितियों और उसकी जांच पर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करे. 3 हफ्ते बाद मामले पर आगे विचार किया जाएगा. वकील विशाल तिवारी की तरफ से दाखिल याचिका में 2017 से लेकर अब तक यूपी में हुए सभी 183 एनकाउंटर की जांच भी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज की अध्यक्षता वाली कमिटी से करवाने की मांग की गई है.

इस पर जजों ने कहा कि असद एनकाउंटर समेत सभी मुठभेड़ को याचिकाकर्ता संदिग्ध बता रहे हैं. हम यह जानना चाहते हैं कि विकास दुबे एनकाउंटर के बाद गठित जस्टिस बी एस चौहान आयोग ने जो सिफारिशें दी थीं, उत्तर प्रदेश सरकार ने उन पर अमल करने को लेकर क्या कदम उठाए हैं? अगली सुनवाई में हमें इसकी भी जानकारी दी जाए.

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