नहीं रहे शेफ अली अहमद, जानें दुनिया को कैसे दी थी चिकन टिक्का मसाला की रेसिपी

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मुंबई : 22 दिसंबर चिकन टिक्का मसाले का आविष्कार करने वाले अली अहमद असलम का 77 वर्ष की आयु में निधन हो गया है, चिकन टिक्का मसाला ब्रिटेन का पसंदीदा व्यंजन है, जिसे सीटीएम के नाम से भी जाना जाता है,

मिस्टर अली के नाम से प्रसिद्ध असलम का 77 वर्ष की आयु में निधन हो गया और उनके पांच बच्चे हैं, असलम के निधन की खबर स्काटलैंड के ग्लासगो में स्थित उनके शीश महल रेस्तरां ने दी है,
असलम ने 1964 में इस रेस्तरां को खोला था, रेस्तरां द्वारा फेसबुक पर असलम के निधन को लेकर एक पोस्ट किया गया, जिसमें लिखा था, आईआरपी मिस्टर अली, मिस्टर अली का आज सुबह निधन हो गया..

हम सभी उनके निधन से बेहद दुखी हैं

Chef Ali Ahmed Aslam (Photo-shishmahal.co.uk)

अगर आप नॉनवेज खाने के शौकीन हैं तो आपने चिकन टिक्का मसाला का स्वाद भी चखा होगा. नॉनवेज प्रेमियों को चिकन टिक्का मसाला का स्वाद काफी अच्छा लगता है, लोग इसे चाव से खाते हैं. स्कॉटलैंड के शेफ अली अहमद को चिकन टिक्का मसाला की रेसिपी का आविष्कार करने का क्रेडिट दिया जाता है. कहा जाता है कि इसे पहली बार अली अहमद ने ही बनाया था. आज यानी 22 दिसंबर को स्कॉटिश शेफ अली अहमद का 77 साल की उम्र में निधन हो गया.

कैसे आया चिकन टिक्का मसाला बनाने का आइडिया?
अली अहमद ने 1970 में पहली बार चिकन टिक्का मसाला बनाया था. दरअसल, 1970 में एक ग्राहक की शिकायत के बाद उन्हें चिकन टिक्का मसाला बनाने का आइडिया आया. चिकन टिक्का मसाला पहली बार उनके ही रेस्तरां में बनाया गया था जब एक ग्राहक ने चिकन टिक्का खाते वक्त सॉस ऑर्डर किया और कहा कि चिक्कन टिक्का काफी ड्राई (सूखा) है.

जब ग्राहक ने चिकन टिक्का के ड्राई होने की शिकायत की, तब अली अहमद ने चिकन टिक्का को योगर्ट, क्रीम और मसालों के सॉस में पकाना शुरू किया. ऐसे चिकन टिक्का मसाला का अविष्कार हुआ और देखते ही देखते चिकन टिक्का मसाला दुनियाभर में मशहूर हो गया. 2009 में AFP न्यूज एजेंसी को दिए एक इंटरव्यू में अली अहमद ने बताया था कि चिकन टिक्का मसाला ग्राहकों के स्वादानुसार बनाया जाता है. उन्होंने कहा कि ग्राहकों को हॉट करी के साथ खाना पसंद नहीं होता था इसलिए चिकन टिक्का मसाला को योगर्ट और क्रीम से बने सॉस के इस्तेमाल से बनाया जाता है.

अली अहमद असलम पाकिस्तान के पंजाब इलाके में पैदा हुए थे. बाद में वह अपने परिवार के साथ ग्लासगो चले गए. उन्होंने 1964 में ग्लासगो के पश्चिमी छोर में अपना शीश महल खोला. अली अहमद के निधन की खबर उनके स्कॉटलैंड के ग्लासगो स्थित इसी शीशमहल रेस्तरां द्वारा दी गई.

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