मुंबई : क्राइम ब्रांच ने राज्य मंत्रालय में नौकरी दिलाने के नाम युवकों को झांसा और ठगी के आरोप में सचिवालय के एक चपरासी सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया. क्राइम ब्रांच की यूनिट 6 द्वारा मंगलवार को गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान मंत्रालय के चपरासी सचिन डोलस और दो संपर्क एजेंट महादेव शिरवाले और नितिन साठे के रूप में हुई है.
पुलिस ने आरोपियों पर पर आईपीसी की धाराओं के तहत धोखाधड़ी, जालसाजी, विश्वासघात और आपराधिक साजिश की धारा 120 बी के तहत मामला दर्ज किया गया है. पुलिस ने उनके बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है क्योंकि उन्होंने ज्यादातर चेक के जरिए पैसे स्वीकार किए थे. पुलिस को ठगों की मोबाइल फोन से कुछ फर्जी नियुक्ति पत्र भी जब्त किए गए हैं. उधर सूत्रों से मालूम हुआ है कि पुलिस फरार चल रहे चेंबूर निवासी महेंद्र सकपाल की तलाश कर रही है.
पुलिस ने बताया कि मलाड के निवासी सागर जाधव ने शिकायत दर्ज कराई थी जिसमे बताया कि कम से कम 10 लोगों के साथ ठगी हुई है. जाधव ने अपने आरोप पत्र में बताया कि ठग सकपाल से उनकी मुलाकात उनके पिता के दोस्त ने कराई थी. सतपाल ने बताया था कि उसकी पहचान मत्रालय में विशिष्ठ अधिकारीयों से पहचान है, खासतौर पर नितिन कुंडलिक साठे बहुत करीबी है. जाधव ने अपने शिकायत में बताया कि सकपाल ने मंत्रालय में “स्थाई” नौकरी मिलने के लिए 6 लाख की भुगतान चेक की माध्यम करने को बोला.
जाधव ने अपने शिकायत में बताया कि 2021 में मैंने और मेरे दो कजिन- आकाश और प्रियंका ने सकपाल को नौ लाख रुपये भुगतान किये. फरवरी 2022 में सकपाल ने बताया की हमारी नियुक्ति हो चुकी और हमें मेडिकल देना है लेकिन सतपाल ने कोविड-19 बहाना दे दे कर अगस्त तक इंतजार करने को बोला. उन्होंने बताया कि आधा काम हो चुका है, अब वे साक्षात्कार के बाद नियुक्ति पत्र देंगे.
उन्होंने मंत्रालय में साक्षात्कार के लिए अस्थायी पहचान पत्र दिए. नितिन साठे ने खुद को संयुक्त सचिव बताते हुए हमारी इंटरव्यू ली और उसके बाद उन्होंने हमारी साडी कागजात भी चेक किये थे. कुछ दिनों के बाद जब भी सकपाल को फोन करता था, तो वह उसे बताता था कि मराठा आरक्षण मुद्दे और कोविड-19 महामारी के कारण प्रशासन के काम में देरी हुई है.
जुलाई में डोलास ने तीनों को मंत्रालय बुलाया और आगे की औचारिकता पूरी होने तक उन्हें एक कमरे में रुकने को बोला. तीनों पीड़ित पता चलता की ‘मंत्रालय’ में कोई साठे नाम का कोई संयुक्त सचिव नहीं है, उन्होंने ठगो को कुल 20 लाख रुपये दे चुके थे.