Lalbaugcha Raja: लालबाग का नाम कैसे पड़ा,

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Lalbaugcha Raja: प्रतिवर्ष लालबाग में अमीर से अमीर और गरीब से गरीब व्यक्ति भी बप्पा के दर्शन करने आते हैं।

Lalbaugcha Raja History: प्रतिवर्ष देशभर काफी धूमधाम से गणेश उत्सव (Ganesh Visarjan) मनाया जाता है, लेकिन देश में अगर कहीं सबसे अधिक गणेश उत्सव (Ganesh Utsav) की चर्चाएं होती हैं तो वो हैं लालबाग के राजा (Lal Baag Ke Raja) , यहां प्रतिवर्ष लाखों भक्तों की भीड़ बप्पा के दर्शन करने के लिए आते हैं, और जो लोग यहाँ दर्शन करने में नहीं आ पाते वे अपने टीवी या इंटरनेट के माध्यम से लालबाग के राजा (Laubaugcha Raja) के दर्शन अवश्य करते हैं. बड़े-बड़े राजनेता, फ़िल्मी सितारे भी जिनके पास सबकुछ है वे भी यहां पर आते हैं और गणेश जी के दर्शन करते हैं. लेकिन कई बार देश के अन्य हिस्सों में रहने वालों के मन में यह यह सवाल जरूर आता है की लालबाग का नाम कैसे पड़ा? इसके पीछे की कहानी क्या है? तो आपके इसी कौतुहल को मिटाने के लिए आज हम आपको बताएँगे की लालबाग का नाम कैसे पड़ा.

हम जिस लालबाग को आज जानते हैं वहां कभी एक वाडी हुआ करती थी, वाडी शहर से दूर एक मोहल्ला होता था, लेकिन यह मोहल्ले या बस्ती से काफी छोटा होता था क्यूंकि वहां केवल पांच से सात घर ही होते थे। बांग्ला में भी वाड़ी शब्द होता है जिसे की बगीचा कहा जाता है। जिस जगह पर आज लालबाग है वहां कभी फिरोजशाह मेहता नाम के शख्स अपने परिवार के साथ रहते थे। ये तो सभी जानते हैं की मुंबई द्वीपों का समूह था और जो समुंदर के किनारे खाड़ियों की जमींन थी उसमें मिट्टी को भरकर टापुओं से मिलाकर एक भू-भाग बनाया गया था। और उसी में चकाचौंध से भरा मुंबई शहर बसाया गया था।

लालबाग नाम कैसे पड़ा
इस जगह पर मिट्टियाँ भरकर इसे समतल इसलिए बनाया गया था क्यूंकि यहाँ पर शहर बसाया जा सके। लेकिन इस स्थान को जिस मिट्टी से समतल किया गया था उसका रंग लाल था जिस कारण से इसका नाम लालवाड़ी पड़ गया था। और यहां पर कटहल, सुपारी और आम का के पौधे लगाए गए थे जो की आगे चलकर बाग़ बन गए। और कुछ समय के बाद लालवाड़ी को लालबाग़ के नाम से जाना जाने लगा।

इस मंडल की स्थापना वर्ष 1934 में अपने मौजूदा स्थान पर (लालबाग, परेल) हुई थी। पूर्व पार्षद श्री कुंवरजी जेठाभाई शाह, डॉ॰ वी.बी कोरगांवकर और स्थानीय निवासियों के लगातार प्रयासों और समर्थन के बाद, मालिक रजबअली तय्यबअली ने बाजार के निर्माण के लिए एक भूखंड देने का फैसला किया।

मंडल का गठन उस युग में हुआ जब स्वतंत्रता संघर्ष अपने पूरे चरम पर था। लोकमान्य तिलक ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ की लोगों की जागृति के लिए ‘सार्वजनिक गणेशोत्सव’ को विचार-विमर्श को माध्यम बनाया था। यहां धार्मिक कर्तव्यों के साथ-साथ स्वतंत्रता संग्राम और सामाजिक मुद्दों पर भी विचार विमर्श किया जाता था। मुम्बई में गणेश उत्सव के दौरान सभी की नजर प्रसिद्ध ‘लालबाग के राजा’ पर होती है। इन्हें ‘मन्नतों का गणेश’ कहा जाता है।

इस साल भक्तों को लाल बाग के राजा का राजमहल सुनहरे रंगीन रंग में देखने को मिल रहा है। मूर्ति कलाकार संतोष कांबली द्वारा बनाई गई है और थीम लोकप्रिय कलाकार नितिन देसाई द्वारा तैयार की गई है। इस बार सुरक्षा के लिए, मुंबई पुलिस, सेना और 35 सरकारी मंडल कार्यकर्ता उपलब्ध हैं। भक्तों की देखभाल करने के लिए करीब 3 हजार मंडल कार्यकर्ता उपलब्ध हैं।

लालबागचा राजा के ऑनलाइन दर्शन के लिए भक्त लालबागचा राजा के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर जा सकते हैं.

कोरोना पाबंदियों और लॉकडाउन के दो साल के लंबे अंतराल के बाद इस बार गणेश चतुर्थी मनाई जा रही है. लोगों में इस बार बहुत अधिक उत्साह है.

मुंबई और उसके आसपास के इलाके के लोग जियो मार्ट के जरिये प्रसाद पा सकते हैं. वहीं, देश के दूसरे हिस्सों में रहने वाले इसके लिए पेटीएम का सहारा ले सकते हैं.

प्रसाद को लेकर यह जानकारी लालबागचा राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल, लालबाग, मुंबई की आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई है.

लोकेशन : G.D आंबेडकर रोड , लालबाग (सेन्ट्रल मुंबई)
दर्शन के लिए जरुरी समय : करीबन २० घंटे
दर्शन के लिए समय : सुबह ५:०० बजे से रात तक
नजदीकी हवाई अड्डा : लालबागचा राजा आने के लिए नजदीकी हवाई अड्डा छत्रपति शिवाजी हवाई अड्डा है,
नजदीकी रेलवे स्टेशन : नजदीकी रेलवे स्टेशन मुंबई सेन्ट्रल पड़ता है, छत्रपति शिवाजी महाराज रेलवे स्टेशन ( CST ) दादर रेलवे स्टेशन पडता है,
रोड और बस से कैसे आये :लालबाग च राजा मुंबई का दर्शन के लिए आने के लिए आपको कई पब्लिकऔर प्राइवेट वाहन मिल जायेंगे,

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