प्रह्लाद मोदी का कहना है कि वह और उनके बड़े भाई नरेंद्र मोदी पिछले आठ सालों से एक-दूसरे से नहीं मिले हैं, जबसे मोदी ने प्रधानमंत्री का पद संभाला है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के छोटे भाई प्रह्लाद मोदी दिल्ली में प्रस्तावित एक विरोध मार्च में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं, जिसमें मांग की गई है कि केंद्र सरकार देशभर में उचित मूल्य की दुकानों के डीलरों के लिए तय कमीशन की दर एक समान करे और इन्हें बढ़ाए.
प्रह्लाद मोदी ऑल इंडिया फेयर प्राइस शॉप डीलर्स फेडरेशन के उपाध्यक्ष हैं और इसी की तरफ से यह विरोध मार्च 2 अगस्त को आयोजित किया जाना है, यदि संगठन की तरफ से उठाई गई मांगें जुलाई तक पूरी नहीं की जाती. प्रस्तावित मार्च रामलीला मैदान से शुरू होगा और संसद भवन पर पहुंचकर खत्म होगा.
उचित मूल्य की दुकानें (एफपीएस) वे हैं जिन्हें राशनकार्ड धारकों को चावल और गेहूं जैसी आवश्यक वस्तुओं के अलावा अन्य चीजें वितरित करने के लिए लाइसेंस दिया गया है.
ऑल इंडिया फेयर प्राइस शॉप डीलर्स फेडरेशन, जिसका मुख्यालय कोलकाता में है, उचित मूल्य की दुकान के मालिकों का प्रतिनिधित्व करता है और फेडरेशन की वेबसाइट के मुताबिक इसका उद्देश्य ‘सार्वभौमिक सार्वजनिक वितरण प्रणाली कायम करना और हंगर-फ्री इंडिया की परिकल्पना करना है.’
महासंघ के सह-अध्यक्ष काली चरण गुप्ता ने बताया कि वे पिछले करीब 10 सालों से कमीशन बढ़ाने की मांग उठा रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘हमें एक किलो राशन पर 70 पैसे का कमीशन मिलता था, अब हमें 90 पैसे मिलता है. हम चार रुपये कमीशन की मांग कर रहे हैं.
यह संगठन सभी राज्यों में एफपीएस मालिकों के लिए एक समान कमीशन की भी मांग करता है. फेडरेशन के सह-अध्यक्ष पुष्प राज देशमुख ने बताया, ‘कुछ राज्यों में यह (मेघालय में) 30 रुपये प्रति क्विंटल मात्र ही है. केंद्र सरकार की तरफ से राज्य सरकारों को एक विशेष राशि आवंटित की जाती हैं और राज्य इसे आगे लागू करते हैं. केंद्र को सभी राज्यों में एक निश्चित समान दर तय करनी चाहिए.’
खुद अहमदाबाद में एक राशन की दुकान चलाने वाले प्रह्लाद मोदी जोर देकर कहते हैं कि वह अपने भाई के खिलाफ नहीं, बल्कि सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध कर रहे हैं.
प्रह्लाद मोदी ने कहा, ‘बिना मांगे तो मां भी नहीं देती. मैं संगठन के साथ काम करता हूं और मैं वही करता हूं जो उचित लगता है. संगठन जो करने का फैसला करेगा, मैं उसका पूरा समर्थन करूंगा.’
उन्होंने बताया कि मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से पिछले आठ सालों में दोनों भाई नहीं मिले हैं. उन्होंने कहा, ‘यहां तक कि जब वह हमारी मां हीराबेन से मिलने आते हैं, तो परिवार से कोई भी सदस्य वहां मौजूद नहीं होता है.’