रिज़र्व बैंक ने इस बार सरकार को सिर्फ़ 30,307 करोड़ का ही सरप्लस थमाया है। सरकार को उम्मीद थी कि उसे 74000 करोड़ मिलेंगे।
बीते साल उसे 99,126 करोड़ मिले थे। पैसा क्यों कम हुआ? यह सवाल दलाल मीडिया के लंपट और दलाल संपादक कभी नहीं उठाएंगे।
कोविड काल में मोदी सरकार ने मूर्खता दिखाते हुए लोन मेला लगाया। वित्त मंत्री खुद मेला लगाकर बैठीं।
क्या हुआ? बैंकों ने झक मारकर लिक्विडिटी का 7 लाख करोड़ रिज़र्व बैंक के पास रखवा दिया और उससे ब्याज़ भी वसूला।
चालू वित्त वर्ष में रिज़र्व बैंक ने 6-7 लाख करोड़ के रिवर्स रेपो की नीलामी की। सब सरकार की बेवकूफ़ी के कारण।
अब मोदी सरकार के पास घाटे की भरपाई के लिए LIC बेचने का 20500 करोड़ और GST सरप्लस के सिवा कुछ नहीं है।
इस देश की इकॉनमी क्रैश होने के मोड में है। इसे संभालना वित्त मंत्री के बस में नहीं।
प्रधानमंत्री मोदी तो यही चाहते हैं सब बिक जाए। और सरकार बस खोदती रहे।
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