CAT का ऐतिहासिक आदेश: समीर वानखेड़े के खिलाफ चार्ज मेमो रद्द

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यह जांच नहीं, साज़िश थी… यह न्याय नहीं, बदले की कार्रवाई थी” — केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण

Mumbai : नई दिल्ली से आई यह खबर भारतीय प्रशासनिक इतिहास में नज़ीर (precedent) बनने जा रही है।
केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT), प्रधान पीठ, नई दिल्ली ने आईआरएस अधिकारी समीर वानखेड़े के खिलाफ जारी चार्ज मेमोरेंडम को पूरी तरह रद्द (Quash) कर दिया है और केंद्र सरकार व CBIC के रवैये पर ऐसी तीखी टिप्पणियां की हैं, जो बहुत कम मामलों में देखने को मिलती हैं।

न्यायाधिकरण ने साफ शब्दों में कहा कि यह विभागीय कार्रवाई
कानून में दुर्भावना (Malice in Law)
शक्ति का रंगीन और गलत प्रयोग (Colourable Exercise of Power)
प्रक्रिया का खुला दुरुपयोग
और निजी दुश्मनी व प्रतिशोध से प्रेरित थी।

CAT की ऐतिहासिक टिप्पणी

पीठ ने कहा कि समीर वानखेड़े के खिलाफ प्रस्तावित जांच एक “दिखावटी और फर्ज़ी (Farcical) प्रक्रिया” होती, जिसका नतीजा पहले से तय था।
न्यायाधिकरण ने माना कि ऐसी जांच चलने देना अधिकारी को लगातार उत्पीड़न, मानसिक दबाव और सार्वजनिक अपमान की ओर धकेलता।
यही कारण है कि CAT ने हस्तक्षेप करते हुए कहा —
“न्याय के नाम पर उत्पीड़न की अनुमति नहीं दी जा सकती।”

केंद्र सरकार और CBIC कटघरे में

इस फैसले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि CAT ने केंद्र सरकार और Central Board of Indirect Taxes and Customs (CBIC) के रवैये को भी कठघरे में खड़ा कर दिया।

न्यायाधिकरण ने कहा कि:

पहले दिए गए अंतरिम आदेशों की जानबूझकर अवहेलना की गई
न्यायाधिकरण की गरिमा और अधिकार क्षेत्र को कमजोर करने की कोशिश हुई
प्रशासन ने कानून के शासन की जगह अहंकार और जल्दबाज़ी को चुना
CAT की टिप्पणी साफ संदेश देती है —
न्यायिक संस्थाओं को चुनौती देने की कीमत चुकानी पड़ती है।

घटनाक्रम जिसने साज़िश की पोल खोल दी

न्यायाधिकरण ने पूरे घटनाक्रम को जोड़कर देखा और कहा कि यह महज़ संयोग नहीं हो सकता।

वानखेड़े ने पदोन्नति आदेश लागू न होने पर अवमानना याचिका दायर की
CAT ने CBIC चेयरमैन को व्यक्तिगत रूप से तलब किया
सरकार ने इस आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी
हाईकोर्ट में मामला सुरक्षित रहते हुए
उसी दौरान चार्ज मेमोरेंडम जारी कर दिया गया

CAT ने कहा कि यह पूरी श्रृंखला साफ बताती है कि चार्ज मेमो
आरोपों से नहीं, बदले की भावना से पैदा हुआ।

नियम, संविधान और कानून—सबका उल्लंघन

न्यायाधिकरण ने माना कि चार्ज मेमोरेंडम:
संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन करता है
CCS (CCA) Rules, 1965 के नियम 14(3) और 14(4) का पालन नहीं करता
चार्जशीट में गवाहों की सूची ‘NIL’ थी
कोई ठोस, ताज़ा या स्वीकार्य साक्ष्य मौजूद नहीं था
CAT ने स्पष्ट कहा:
“बिना सबूत और गवाह के चार्जशीट कानूनन ज़िंदा नहीं रह सकती।”

पूर्वनिर्धारित मानसिकता पर तीखा प्रहार

न्यायाधिकरण ने कहा कि पूरी कार्रवाई से प्रशासन की:
पूर्वनिर्धारित सोच
गैर-आवेदनशील रवैया
और अत्यधिक जल्दबाज़ी
खुलकर सामने आती है।
यह जांच नहीं, बल्कि पहले सज़ा तय करके आरोप ढूंढने की कोशिश थी।

अंतिम फैसला: न्याय की जीत

इन सभी तथ्यों और कानून के आधार पर CAT ने: ✅ चार्ज मेमोरेंडम को रद्द किया
✅ समीर वानखेड़े को सभी परिणामी लाभ देने का आदेश दिया
❌ भारी लागत लगाने से परहेज किया, लेकिन सख्त चेतावनी दी
न्यायाधिकरण ने उम्मीद जताई कि
प्रशासन भविष्य में कानून के शासन के अनुरूप काम करेगा।

BandhuNews का सीधा सवाल

अगर जांच ही “दिखावटी” हो,
अगर कार्रवाई “प्रतिशोध” से प्रेरित हो,
और अगर सत्ता कानून से ऊपर खुद को समझने लगे —
👉 तो जवाबदेही किसकी तय होगी?
📢 BandhuNews बोलेगा, क्योंकि सच चुप नहीं रहता।

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