Mumbai : बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि अगर हुक्के में तंबाकू या निकोटिन नहीं है, तो हर्बल या टोबैको-फ्री हुक्का सर्व करना वैध है, बशर्ते कि COTPA (Cigarettes and Other Tobacco Products Act, 2003) का उल्लंघन न हो।
अदालत ने अपने 2019 के आदेश को दोहराते हुए कहा कि राज्य सरकार कानून के दायरे में रहकर ही कार्रवाई करे।
🔹 केवल तंबाकू मिलने पर ही होगी कार्रवाई
न्यायमूर्ति रियाज़ छागला और फरहान दुबाश की खंडपीठ ने कहा कि यदि किसी शिकायत पर जांच के दौरान हुक्का पार्लर में तंबाकू पाया जाता है, तभी अधिकारियों को कार्रवाई करने का अधिकार होगा।
अगर हुक्का पूरी तरह हर्बल है, तो पुलिस किसी भी प्रकार की छापेमारी या धमकी नहीं दे सकती।
🔹 रेस्टोरेंट मालिकों की याचिकाएं हुईं निपटारा
यह फैसला उन रेस्टोरेंट मालिकों की याचिकाओं पर आया जिन्होंने पुलिस द्वारा बार-बार छापे और धमकियों की शिकायत की थी।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि 2019 के आदेश के बावजूद पुलिस की मनमानी से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
🔹 कोर्ट ने कहा – कानून का पालन जरूरी
अदालत ने कहा, “याचिकाकर्ताओं को रेस्तरां चलाने या बिना तंबाकू वाले हुक्के परोसने से रोका नहीं जा सकता।
लेकिन उन्हें COTPA के सभी नियमों का पालन करना होगा।”
साथ ही अदालत ने चेतावनी दी कि राज्य सरकार को केवल उन्हीं मामलों में कार्रवाई करनी चाहिए जहां कानून का उल्लंघन हो रहा हो।
🔹 केवल उच्च अधिकारी ही ले सकते हैं कार्रवाई
अदालत ने राज्य सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे पर गौर करते हुए कहा कि
केवल असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर (API) या उससे ऊपर के अधिकारी ही COTPA के तहत कार्रवाई कर सकते हैं।
अगर किसी पार्लर में ड्रग्स या नशीले पदार्थ पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
🔹 जून 2025 के सरकारी सर्कुलर पर उठे सवाल
याचिकाकर्ताओं ने अधिवक्ता राजेंद्र राठौड़ और ध्रुव बी. जैन के माध्यम से कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था।
उन्होंने कहा कि राज्य के गृह विभाग ने 6 जून 2025 को जारी सर्कुलर में सभी हुक्का पार्लर्स पर सख्त कार्रवाई के आदेश दिए थे,
जिससे हर्बल हुक्का परोसने वाले भी निशाने पर आ गए।
🔹 कोर्ट का अंतिम निर्देश
अदालत ने कहा —
> “जब तक याचिकाकर्ता COTPA के प्रावधानों का पालन कर रहे हैं और कोई प्रतिबंधित पदार्थ नहीं परोस रहे हैं, तब तक उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती।”
साथ ही, कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि यह निर्णय सभी संबंधित अधिकारियों तक तुरंत पहुँचाया जाए।
क्या हर्बल के नाम पर तंबाकू की दुकानें फिर खुलेंगी?
