मुंबई : मराठा आरक्षण की मांग को लेकर छिड़े आंदोलन ने मुंबई की रफ्तार को रोक दिया है। शनिवार को आंदोलन का दूसरा दिन था और दक्षिण मुंबई की सड़कों पर हजारों लोगों का सैलाब उमड़ आया। मनोज जरांगे पाटिल के नेतृत्व में मराठा समाज आरक्षण की लड़ाई लड़ रहा है, लेकिन इसका असर सबसे ज्यादा मुंबई के ट्रैफिक और रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर पड़ा।
🌧 बारिश, भूख हड़ताल और भीड़ का हुजूम
भारी बारिश के बावजूद जरांगे पाटिल आजाद मैदान के शेड में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर डटे हैं। उनका कहना है कि “आरक्षण मिले बिना यह आंदोलन खत्म नहीं होगा, चाहे गोली खानी पड़े या जेल जाना पड़े।”
सैकड़ों नहीं बल्कि हजारों लोग उनके साथ हैं। शुक्रवार को ही करीब 45,000 लोग दक्षिण मुंबई में जुट गए थे, जिनमें से 30,000 ने वहीं रात गुज़ारी। स्टेशन, फुटपाथ और फोर्ट की इमारतों के बरामदों में मराठा समाज के लोग रात भर ठहरे रहे।
जाम का झाम
CSMT और बीएमसी मुख्यालय के पास प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चौक को जाम कर दिया। नतीजतन, गेटवे ऑफ इंडिया और फोर्ट इलाके तक गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं। लोकल ट्रेन से उतरने वाले यात्रियों को भी जगह-जगह भीड़ और नारेबाज़ी के कारण परेशानी झेलनी पड़ी।
मुंबई पुलिस और ट्रैफिक विभाग ने आंदोलनकारियों से अपील की कि वे विरोध के लिए सिर्फ आज़ाद मैदान का उपयोग करें, लेकिन प्रदर्शनकारी सड़क और चौराहों पर डटे रहे।
आंदोलन का भोजन: सड़क पर खिचड़ी और पैकेट
शुक्रवार रात प्रदर्शनकारियों को सड़क पर ही भोजन पकाना पड़ा। बड़े-बड़े भगौनों में पोहा और खिचड़ी बनी। शनिवार को आयोजकों और बीएमसी की ओर से खाने के पैकेट बांटे गए। खिचड़ी बांटते हुए कई कार्यकर्ता भीड़ में नज़र आए। हालांकि, कई आंदोलनकारियों ने पानी और आश्रय की कमी को लेकर नाराज़गी भी जताई।
आंदोलन की गूंज: कला से सत्ता तक
शनिवार शाम को कई प्रदर्शनकारी जहांगीर आर्ट गैलरी तक पहुंच गए। वहां उन्होंने राजनेताओं के खिलाफ जमकर नारेबाज़ी की। उनके नारों में सत्ता से नाराज़गी और आरक्षण की मांग साफ झलक रही थी।
अव्यवस्था और चिंता
नवी मुंबई में भी हजारों वाहनों से आए प्रदर्शनकारियों का जमावड़ा रहा। बीड से आए एक समूह ने एक जोड़े से बदसलूकी की, जिसके बाद जोड़ा तुरंत वहां से निकल गया। यह घटना पुलिस के लिए चिंता का सबब बनी।
दक्षिण मुंबई में 45,000 से ज्यादा लोग पहुंचे
30,000 लोगों ने स्टेशन और मैदान में बिताई रात
भारी बारिश और भूख हड़ताल के बीच आंदोलन जारी
भोजन और पानी की व्यवस्था को लेकर सवाल उठे
मुंबई की सड़कों पर जाम, आम लोगों को भारी दिक़्क़त
मराठा समाज का कहना है कि “जब तक आरक्षण नहीं मिलेगा, हम मैदान नहीं छोड़ेंगे।”
अब सबकी नज़र इस पर है कि सरकार और जरांगे पाटिल के बीच बातचीत किस दिशा में जाती है।
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