इसराइल में प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नज़र आ रही हैं.
बीते साल सात अक्तूबर को हमास के हमले के बाद ये विरोध प्रदर्शन कुछ वक़्त के लिए शांत हो गए थे लेकिन छह महीनों बाद अब फिर इसराइल की सड़कों पर हज़ारों प्रदर्शनकारी उतरे हैं.
यरूशलम में पुलिस बदबूदार पानी की तेज़ बौछारों के ज़रिए इन प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिशें की गईं. इन प्रदर्शनकारियों ने शहर के उत्तर-दक्षिण हाईवे को ब्लॉक किया.
प्रदर्शनकारी नेतन्याहू के इस्तीफ़े और जल्दी चुनाव करवाए जाने की मांग कर रहे हैं. इन लोगों की मांग ये भी है कि हमास के क़ब्ज़े में अब भी जो 130 इसराइली बंधक हैं, उन्हें छुड़वाने के लिए जल्द से जल्द डील की जाए. इनमें से कुछ लोगों के बारे में माना जा रहा है कि वो मारे जा चुके हैं.
बंधकों के परिवारों, दोस्तों और प्रदर्शनकारियों का डर ये है कि जंग जितने ज़्यादा दिन चलेगी, उतने ज़्यादा लोगों की जान जाएगी.
ओस्लो समझौते के तहत फ़लस्तीनियों के लिए एक अलग स्वतंत्र देश का प्रावधान था. लेकिन नेतन्याहू अलग फ़लस्तीन देश के हमेशा से विरोधी रहे हैं. वे इस दिशा में अमेरिकी प्रयासों को भी रद्द करते रहे हैं.
लेकिन जिस तरह से ये युद्ध लड़ा जा रहा है और जैसे अब तक सभी बंधकों को नहीं छुड़ाया गया है, उससे नेतन्याहू का सियासी करियर दांव पर लग गया है.