Maharashtra Politics: उत्तर प्रदेश के बाद लोकसभा सबसे ज्यादा सीटें महाराष्ट्र में हैं। बीजेपी ने राज्य की 48 में 45 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। पार्टी को पीएम मोदी के करिश्माई नेतृत्व और गारंटी पर भरोसा है, लेकिन पिछले दो साल राजनीतिक हलचल का केंद्र बने महाराष्ट्र में बीजेपी चिंतित है।
राज्य में सत्तारूढ़ बीजेपी के अगुवाई वाले महायुति ने 48 में 45 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। 2019 में बीजेपी अविभाजित शिवसेना के साथ मिलकर 41 सीटों पर जीत हासिल की थी। क्या बीजेपी महाराष्ट्र में नए सहयोगियों के साथ पुराने प्रदर्शन से दोहराते हुए आगे निकल पाएगी?
ये ऐसा सवाल है कि जिसका जवाब 4 जून को ईवीएम खुलने पर मिलेगा। पिछले दो साल में सर्वाधिक उठापठक का शिकार हुए महाराष्ट्र से कांग्रेस को भी काफी उम्मीदें हैं यही वजह है कि कांग्रेस न सिर्फ अपने चुनाव अभियान ‘हैं तैयार हम’ के आगाज के लिए महाराष्ट्र को चुना था और नागपुर में रैली की थी। अब कांग्रेस ने भारत जोड़ो न्याय यात्रा का समापन करने के लिए शिवाजी पार्क में रैली की है
इसमें शिवसेना (यूबीटी) के नेता उद्धव ठाकरे को काफी तवज्जो मिली वे अग्रिम पंक्ति में राहुल गांधी के साथ बैठे, हालांकि शिवसेना नेता और महाराष्ट्र के सीएम ने राहुल गांधी की शिवाजी पार्क में रैली को शिवसैनिकों के लिए ब्लैक संडे करार दिया।
राजनीतिक हलकों में जो चर्चा है उसके अनुसार बीजेपी के लिए महाराष्ट्र में दो बड़ी चिंताओं का जिक्र हो रहा है। पहली चिंता है कि अगर दलित वोट खिसका तो पार्टी को नुकसान हो सकता है। यही वजह है कि MVA के नेता प्रकाश आंबेडकर की हार्ड बारगेनिंग के बाद भी बातचीत जारी रखे हुए हैं। महाराष्ट्र के दलितों में अगर यह बात नीचे तक पहुंचती है कि अगर बीजेपी सत्ता में तीसरी बार लौटी तो वह संविधान बदल देगी? तो नुकसान और भी अधिक हो सकता है। पिछले दिनों शिवाजी पार्क में ही प्रकाश आंबेडकर ने संविधान बचाओ रैली की थी।
बीजेपी की चिंता यह है कि अगर सिंपैथी फैक्टर काम किया तो उद्धव ठाकरे और शरद पवार को लाभ मिल सकता है। ऐसे में बीजेपी पीएम मोदी के करिश्माई नेतृत्व और गारंटी स्लोगन के बाद भी थोड़ी चिंतित है। राजनीतिक हलकों में पहले भी यह चर्चा होती आई है कि उद्धव ठाकरे और शरद पवार को जनता की सिंपैथी मिल सकता है।