क्या आपमें से कोई इस प्लेन में आकर बैठेंगे अगर आपको यह पता चले कि पायलट की योग्यता स्टेशन पर चाय बेंचने और 35 साल भीख मांगने की रही है।
शायद नहीं,

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मगर आपने इस पायलट को इतने बड़े देश की जिम्मेदारी दे दी, कैसे?
माना कि आप किसी व्यक्ति से बेइंतहां मुहब्बत करते हैं, उसके किसी अच्छे बुरे काम, नफरती या साम्प्रदायिक एजेंडे को पसंद करते हैं। मगर जब वह व्यक्ति किसी पद या जिम्मेदारी पर होता है तब किसी खास काम के लिए आप उस व्यक्ति की पढ़ाई लिखाई एक्सपेरिएंस और योग्यता कम से कम दस बार चेक करते हैं, वेरिफाई करते हैं।
चाय बेंचना या भीख माँगना बुराई नहीं है, मगर चाय वाले भीख मंगे को अगर आप आरबीआई का गवर्नर बना दें,
अगर आप सर्जरी के लिए डॉक्टर बना दें
अगर आप उसे यूनिवर्सिटी का प्रोफेसर बना दें
अगर आप उसे इसरो का साइंटिस्ट बना दें
अगर आप उसे किसी रिसर्च सेंटर का डायरेक्टर बना दें
*अगर आप उसे किसी प्लेन का पायलट बना दें
*तो वह ज्यादा से ज्यादा क्या करेगा?
दूध या पानी में चाय की पत्ती डालेगा, खौलायेगा, उबालेगा, थोड़ा अदरख, थोड़ा काली मिर्च, थोड़ा इलायची, थोड़ा तुलसी, थोड़ा पोस्ता दाना डालकर उसे जायके दार बना सकता है।
मगर आप उसे डॉक्टर, गवर्नर, प्रोफेसर, साइंटिस्ट, पायलट या किसी इंस्टीच्यूट का डायरेक्टर तो कत्तई नहीं बनाएंगे। इतनी समझ तो होगी आप में, मगर आप कैसे चूक गए? सिर्फ रिश्तों या इमोशन्स से देश तो नहीं चलता, उसे चलाने के लिए काबिल लोग चाहिए, सुना है बड़े लोग, पढ़े लिखे विद्वान, काबिल और कम्पिटेंट लोग कम बोलते हैं, ज्यादा सुनते हैं।
*मगर यहाँ भी आपने लच्छेदार भाषण को ही योग्यता समझ ली, चाय वाले भिखारी को डॉक्टर बना दी वो भी क्रिटीकल सर्जरी की, चले थे पथरी और ट्यूमर निकालने उसने तो आप की फेफड़े और आंत ही निकाल दी।क्या आपमें से कोई इस प्लेन में आकर बैठेंगे अगर आपको यह पता चले कि पायलट की योग्यता स्टेशन पर चाय बेंचने और 35 साल भीख मांगने की रही है।
शायद नहीं, मगर आपने इस पायलट को इतने बड़े देश की जिम्मेदारी दे दी, कैसे?
माना कि आप किसी व्यक्ति से बेइंतहां मुहब्बत करते हैं, उसके किसी अच्छे बुरे काम, नफरती या साम्प्रदायिक एजेंडे को पसंद करते हैं। मगर जब वह व्यक्ति किसी पद या जिम्मेदारी पर होता है तब किसी खास काम के लिए आप उस व्यक्ति की पढ़ाई लिखाई एक्सपेरिएंस और योग्यता कम से कम दस बार चेक करते हैं, वेरिफाई करते हैं।
चाय बेंचना या भीख माँगना बुराई नहीं है, मगर चाय वाले भीख मंगे को अगर आप आरबीआई का गवर्नर बना दें,
अगर आप सर्जरी के लिए डॉक्टर बना दें
अगर आप उसे यूनिवर्सिटी का प्रोफेसर बना दें
अगर आप उसे इसरो का साइंटिस्ट बना दें
अगर आप उसे किसी रिसर्च सेंटर का डायरेक्टर बना दें
*अगर आप उसे किसी प्लेन का पायलट बना दें
*तो वह ज्यादा से ज्यादा क्या करेगा?
दूध या पानी में चाय की पत्ती डालेगा, खौलायेगा, उबालेगा, थोड़ा अदरख, थोड़ा काली मिर्च, थोड़ा इलायची, थोड़ा तुलसी, थोड़ा पोस्ता दाना डालकर उसे जायके दार बना सकता है।
मगर आप उसे डॉक्टर, गवर्नर, प्रोफेसर, साइंटिस्ट, पायलट या किसी इंस्टीच्यूट का डायरेक्टर तो कत्तई नहीं बनाएंगे। इतनी समझ तो होगी आप में, मगर आप कैसे चूक गए? सिर्फ रिश्तों या इमोशन्स से देश तो नहीं चलता, उसे चलाने के लिए काबिल लोग चाहिए, सुना है बड़े लोग, पढ़े लिखे विद्वान, काबिल और कम्पिटेंट लोग कम बोलते हैं, ज्यादा सुनते हैं।
*मगर यहाँ भी आपने लच्छेदार भाषण को ही योग्यता समझ ली, चाय वाले भिखारी को डॉक्टर बना दी वो भी क्रिटीकल सर्जरी की, चले थे पथरी और ट्यूमर निकालने उसने तो आप की फेफड़े और आंत ही निकाल दी

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