मुंबई : महाराष्ट्र की सियासत से एक बेहद चौंकाने वाली और सनसनीखेज़ खबर सामने आई है। अंबरनाथ नगर परिषद में सत्ता के गणित ने सबको हैरान कर दिया है। जहाँ आमतौर पर एक-दूसरे के खिलाफ खड़ी रहने वाली बीजेपी और कांग्रेस इस बार एक ही मंच पर दिखाई दीं और शिवसेना (शिंदे गुट) को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया।
कांग्रेस के समर्थन से बीजेपी ने अंबरनाथ नगर परिषद में बहुमत हासिल कर लिया है। बीजेपी की तेजश्री करंजुले नगराध्यक्ष पद पर विजयी हुई हैं।
इस गठबंधन में बीजेपी के 16, कांग्रेस के 12 और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) के 4 नगरसेवक शामिल हैं। कुल 32 नगरसेवकों के समर्थन से बीजेपी ने परिषद पर कब्ज़ा जमाया।
शिंदे गुट का तीखा हमला – “अभद्र युति”
“जो बीजेपी ‘कांग्रेस-मुक्त भारत’ की बात करती थी, वही आज कांग्रेस के साथ हाथ मिलाकर शिवसेना के साथ विश्वासघात कर रही है।”
बीजेपी उपाध्यक्ष गुलाबराव करंजुले पाटील ने शिंदे गुट के आरोपों का जवाब देते हुए कहा—
“अगर पिछले 25 वर्षों से भ्रष्टाचार करने वाले शिंदे गुट के साथ सत्ता में बैठे रहते, तो वही असली ‘अभद्र युति’ होती।”
उन्होंने यह भी दावा किया कि अंबरनाथ नगर परिषद में महायुति के तहत शिंदे गुट से कई बार बातचीत की गई, लेकिन उनकी ओर से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली।
स्थानीय निकाय चुनावों में बीजेपी का दबदबा
288 नगर परिषद
207 नगर पंचायतों
में अध्यक्ष पदों पर जीत दर्ज की।
वहीं विपक्षी महाविकास अघाड़ी महज 44 सीटों पर ही सिमटकर रह गई।
सियासी संदेश साफ
अंबरनाथ की यह सियासी ‘युति’ साफ संकेत देती है कि स्थानीय राजनीति में समीकरण बदलने से कोई भी दल पीछे नहीं हटता, चाहे वह वैचारिक विरोधी ही क्यों न हो। आने वाले दिनों में इस गठबंधन की गूंज महाराष्ट्र की राजनीति में और तेज़ होने की पूरी संभावना है।
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